भारतीय संस्कृति और परंपरा के अनुसार,रक्षा बंधन का इतिहास काफी पुराना है। बताया जाता है कि द्वापर युग में द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण की कलाई पर साड़ी के पल्लू की चीर बांधी थी, जो कौरवों से उसकी लाज बचाने का माध्यम बनी थी। उस घटना के बाद से ही रक्षा के प्रतीक स्वरूप में रक्षाबंधन त्यौहार मनाया जाता है। ऐसे ही रक्षा के प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार श्री बालाजी वृध्द्जन आवास मे वृद्धजनो को रक्षाशूत्र बांध कर उनकी रक्षा का वादा किया गया। रक्षाबंधन के त्यौहार का मतलब सिर्फ राखी और गिफ्ट तक ही सीमित नहीं है बल्कि साथ ही ये दिन है अपने भाई – बहन के प्रति अपने जज्बातों को बयां करने का। यहां हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं श्री बालाजी वृध्द्जन आवास कुछ चुनिंदा रक्षा बंधन कार्यकर्म के पल…….











